भारतीयता
मैं भारत का नागरिक हूँ
भारत में पला हूँ
भारतीयता मेरी रगों में दौड़ रही है
एक अनोखा गर्व महसूस करता हूँ
देश से प्यार करता हूँ
लेकिन क्या है यह भारतीयता
इसका एहसास
इसकी परिभाषा
इसका प्राण
क्या है इसकी परंपरा, पहचान
क्या भारत सिर्फ़ एक देश का नाम है
सिर्फ़ एक भूखंड का परिचय पत्र
एक संविधान का नाम
अरुणाचल का सुबह
या कोंकण की शाम
सोचता हूँ एकांत में बैठकर
भारतीयता का असली रूप
उसकी प्यारभरी पुकार
उसके कुछ क़ायदे, क़ानून
जो देता है मुझको सुकून
भारतीयता का अर्थ कोई धर्म में छिपा नहीं
भारतीयता के मायने कोई किताब के पन्नों में नहीं
कोई रस्म, रिवाज़, बोलचाल में नहीं
कोई मंदिर, मस्जिद, गिरजा में नहीं
कोई पकवान की ख़ुशबू में नहीं
भारतीयता का स्वरूप है वह वृक्ष
जिसके डालों में बैठे हैं रंग बिरंगे पक्षी
गा रहे हैं विभिन्न सुरों में, खुले दिल से
लेकिन सुनाई दे रहा है बाहर की दुनिया को
सिर्फ़ एक ही गाना, एक ही राग, देश राग
इस राग में मतभेद की आहट ज़रूर है
पर बेसुराता की आँच नहीं
अपने डाल की भलाई के लिए
दूसरे डालों को तोड़ने की स्पृहा नहीं
दूसरों के आँसूओं की चाहत नहीं
जहाँ नीयत हो साफ़ और संकल्प सुदृढ़
जहाँ चेतना हो निष्कलंक और हृदय सहनशील
जहाँ एक दूसरे के बीच रहे सुमधुर आत्मीयता
जहाँ देश की धड़कन जगाए दिल में मानवीयता
यही है मेरा भारत और मेरे शब्दकोश की भारतीयता
सुबीर चक्रवर्ती / २५ मार्च २०१९
