हर पल जो बीत गया
वह चला गया हमारे जीवन से
खो गया इस अपार ब्रह्मांड में
बिछड़ गया इस वर्तमान से
उसका अस्तित्व सिर्फ़ टिका रहता है
हमारी मधुर या कड़वी स्मृतियों में
जो सजीव रहती हैं सदा के लिए
दिमाग की छिपी कोठरियों में
निकलने की उम्मीद रखती है
निस्संकोच, बिना कोई पश्चाताप
हल्की सी आहट, थोड़ी सी चोट
लाती हैं यादों की बारात
तेज़धार स्रोत में बह जाता है
हमारा आज और अक्सर हमारा कल
खो देते हैं अपनी नासमझी में
अपने वर्तमान के कई कीमति पल
हर पल का महत्व उस पल में ही है
न करो उसका नज़रंदाज़
हर पल का मनाओ उत्सव
हर पल की सुनो आवाज़
सुबीर चक्रवर्ती / १० अप्रैल २०१९

Pal Pal ki Baat! Bahut Badiya!!
Rama
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