बुढ़ापा

लोग कहते हैं कि बुढ़ापा बहुत ही भयंकर है
सब उससे डरते हैं
एक दर्दनाक बीमारी की तरह
जीना हराम कर देता है

मैं कहता हूँ, बुढ़ापे से डरना कैसा
शैशव देखा, दिया जवानी का साथ
धीरे धीरे अब आया है बुढ़ापा
बिना कोई आहट या आवाज़

हो सकता है आप
कुछ कम देखे, कुछ कम मनाए त्योहार
हो सकता है कि बच्चे अनसूनी कर दे
आपकी प्यारभरी पुकार

मैं कहता हूँ, कि गले लगा लो
कर लो बुढ़ापे से प्यार
सूरज, चाँद, आसमान को देखो
देखो प्रकृति का बहार

खुली साँस लो गगन के नीचे
पंखुड़ियों से करो इश्क़
सूर्योदय का करो आह्वान
निरखो सूर्यास्त का दृश्य

पड़ाई, खेलकूद में बीता शैशव
भागदौड़ में गयी जवानी
अब आया है बुढ़ापा तो कर लो उससे दोस्ती
न दो अपनी ख़ुशी की क़ुरबानी

सुबीर चक्रवर्ती / १८ नवम्बर २०१९


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